भाई शेयर खरीदने हैं

अचानक एक तूफान सा उठा,

सारे देश में, और

बह गये उसमें सभी,

अमीर, गरीब,

बूढ़े, जवान,

अफसर, चपरासी,

ग्रामीण, शहरी,

दूधवाला और पानवाला भी।

 

सभी की जबान पर,

एक ही चर्चा,

"भाई ! शेयर खरीदने हैं।"

 

अपना काम छोड़कर,

सम्पति गिरवी रखकर,

पत्नी के जेवर बेचकर,

सभी शेयर खरीदने लगे।

कैसी भी कम्पनी हो,

कितने भी रूपयों में हो,

बस शैयर खरीदने है।

इस चक्कर में सब,

भूल गये अपना काम,

हो गया आराम हराम।

 

कुछ माह पहले तक जो,

फर्क नहीं जानते थे,

शेर और शेयर का,

आज बहस कर रहे हैं,

बड़ी बड़ी कम्पनियों के

अर्थशास्त्र पर।

 

बड़ा ही विचित्र है,

यह शेयरों का बाजार,

जहां आदमी नहीं,

सांड और भालू,

कारोबार करते हैं।

जी हां !

बुल एवं बेयर।

कभी बाजार,

सांडों की गिरफ्त में,

तो कभी भालुओं की।

इस बाजार का एक

मशहूर बुल था,

बुल क्या बुलडोझर था।

भालुओं का क्या,

सभी सांडों का भी

सफाया कर गया।

 

एक साहब से पूछा,

क्यों खरीदते हैं आप शेयर ?

बोले,

आप भी खरीदिये,

बडे फायदे का सौदा है।

तीन महीने में एक के दो।

 

मैंने कहा,

कोई पिटारा है जादू का,

यह शेयर बाजार, कि

आज हजार रूपये डालो,

तीन महीने बाद

दो हजार निकालो।

 

क्या पेड़ लगा है रूपयों का

इस बाजार में ?

यदि तीन माह में एक के दो,

तो छह माह में चार और

एक साल में सोलह गुना।

एक लाख पर एक साल में

पन्द्रह लाख का लाभ।

क्या जरूरत है नौकरी की ?

बिना कुछ किये

लाखों का लाभ।

कमाल है !

अरे, जाओ भाई !

वित्त मंत्री को बताओ,

यह मंत्र !

कभी बजट में,

घाटा नहीं होगा।

विदेशी कर्ज खत्म हो जायगा,

और एक वर्ष में,

देश मालामाल हो जायेगा।