पर्यावरण सुरक्षा

मेरे आंगन में लगा

भ्रष्टाचार का पौधा

आज एक

वटवृक्ष बन गया है।

 

अंग्रेज छोड़ गये थे,

भारत से जाते हुए

इसे उसी तरह

जैसे मेरे दादाजी

छोड़ गये थे,

घर के आंगन में,

एक आम का पौधा।

 

इस वृक्ष की

पाताल भेदती जड़े

खोखला कर रही है

मेरे घर की

मज़बूत बुनियादों को।

 

मैं हटा देना चाहता हूं,

नष्ट कर देना चाहता हूं,

झड़ से

उखाड़ देना चाहता हूं,

इस दीमकी वृक्ष को।

 

लेकिन कुछ स्वार्थी लोग

नहीं चाहते कि

यह वृक्ष कटे।

क्योंकि

इसी वृक्ष के फल से

उनका पेट भरता है।

इसकी लकड़ी से

उनका घर सजता है,

उनका चूल्हा जलता है।

 

इसीलिये

रोक रहे हैं मुझे

ये सब

इसे हटाने से,

पर्यावरण सुरक्षा के

नाम पर।