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पर्यावरण और कुर्सी
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नये वर्ष में नेताजी में नया परिवर्तन आया, पर्यावरण के प्रति विशेष प्रेम उमड़ आया । घर से सडक तक और सडक से शहर तक, वृक्षारोपण का व्यापक कार्यक्रम बनाया। पूरे जोश और उत्साह से उसे सफ़ल बनाया। पूछा, इतने वर्षों बाद अचानक यह "पर्यावरण प्रेम" क्यों ? |
बोले वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहा हूँ, लेकिन एक अदद कुर्सी के लिये तरस गया हूँ। आज के लगाये ये नन्हें नन्हें पौधे कल बड़े बड़े पेड़ बन जायेंगे। उनकी टनों लकड़ी आयेगी, जिससे सैंकड़ों हजारों कुर्सियाँ बनाऊंगा, अपने सभी भाई भतीजों और रिश्तेदारों को एक एक कुर्सी पर बिठाऊंगा। अपने पर्यावरण प्रेम का पूरा फ़ायदा उठाऊंगा।
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