आधुनिक कलयुग

एक छोटा बच्चा

अपने आप ही

बड़बड़ा रहा था,

कलयुग आ गया है,

घोर कलयुग !

क्या होगा इस देश का ?

 

मैंने पूछा,

क्या हो गया है बेटे,

कलयुग की चिन्ता करने को

हम बड़े लोग ही

क्या कम थे जो

तुम भी इस चिन्ता में

दुबले हुए जा रहे हो ?

क्या परेशानी है तुम्हें ?

 

कैसे जाना तुमने कि

कलयुग आ गया है ?

बोला अंकल !

आजकल मम्मी पापा

बच्चों की बात नहीं सुनते

बच्चों की बात नहीं मानते ।

 

याद है आपको द्वापर युग की बात ?

जब दुर्योधन का बूढ़ा बाप

आँख मीच कर

अपने बेटे की

हर बात बिना

चूँ चपड़ किये मानता था ।

 

और आज कल के ये माँ बाप

बच्चों की

हर छोटी छोटी बात को

मानना तो दूर,

 उसमें मीन मेख निकालते है।

 

क्या यह काफी नहीं है,

कलयुग की पहचान करने को ?