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आधुनिक कलयुग |
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एक छोटा बच्चा अपने आप ही बड़बड़ा रहा था, कलयुग आ गया है, घोर कलयुग ! क्या होगा इस देश का ?
मैंने पूछा, क्या हो गया है बेटे, कलयुग की चिन्ता करने को हम बड़े लोग ही क्या कम थे जो तुम भी इस चिन्ता में दुबले हुए जा रहे हो ? क्या परेशानी है तुम्हें ?
कैसे जाना तुमने कि कलयुग आ गया है ?
बोला अंकल
! आजकल मम्मी पापा |
बच्चों की बात नहीं सुनते बच्चों की बात नहीं मानते ।
याद है आपको द्वापर युग की बात ? जब दुर्योधन का बूढ़ा बाप आँख मीच कर अपने बेटे की हर बात बिना चूँ चपड़ किये मानता था ।
और आज कल के ये माँ बाप बच्चों की हर छोटी छोटी बात को मानना तो दूर, उसमें मीन मेख निकालते है।
क्या यह काफी नहीं है, कलयुग की पहचान करने को ? |