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कुछ रोज पहले की बात है, एक मित्र से मिलने गये, बैठे कुछ खा रहे थे, पूछा "क्या खा रहे हैं ?" बोले, "हवाला खा रहा हूं।"
मैं बोला, "कुछ समझा नहीं, क्या हलवा खा रहे हो !" बोले, "नहीं, हवाला खा रहा हूं।" मुझे फिर भी समझ नहीं आया।
"भाई, यह कौन सी मिठाई है, किस प्रदेश या देश से आई है ?कभी सुना नहीं इसके बारे में।"
वे हिकारत भरी दृष्टि डाल कर बोले ,किस दुनिया में रहते हो ? दुनिया भर में चर्चा है, इसकी ! बड़ी ही स्वादिष्ट है। बड़े बड़े लोग इसे खाते हैं , औरबिना डकार लिये पचाते है।
मैं कुछ और बोलता इसके पहले दो बच्चे मैले कुचैले कपड़े पहने दौड़ते हुए आये और बोले ,"अंकल जी, नमस्ते!"
मैंने पूछा, "बेटे, क्या नाम है तुम्हारा ?" एक बोला "घोटाला" दूसरी बोली "स्कैंडल" ।बड़े अजीब नाम थे। कभी सुने नहीं थे ऐसे नाम। बड़ा आश्चर्य हुआ, ऐसे भी कोई नाम रखता है अपने बच्चों का।
पूछा , क्या तुम्हें और कोईनाम नहीं मिले थे,जो ऐसे ऊल जलूल नाम रखे हैं। |
मित्र कुछ गम्भीर हुए, बोले कुछ समय लगेगा, तुम्हें समझने में।
देख रहे हो देश के ये हालात। ये बड़े बड़े लोग हज़ारों करोड़ों का घोटाला पलक झपकते कर देते हैं, और यह घटना एक स्कैंडल बन रह जाती है।
कुछ जाँच आयोग ऊपरी जाँच करते हैं, और मामला रफा दफा।
एक हमारे जैसे लोग है जो सडक पर लावारिस पड़े पच्चीस पैसे का सिक्का भी, यह सोचकर नहीं उठाते कि कहीं किसी ने देखा तो बदनामी होगी।
और एक ये हैं, जो फिर तैया हो जाते हैं, एक नया घोटला करने को।
बड़ी शर्म आती है मुझे अपने आप पर ,जब मैं तुलना करता हूं, इन सबसे अपने आप की।
लेकिन मैंने भी एक उपाय ढ़ूढ़ लिया है ,सवेरे जो खाता हूं, शाम जो खाता हूं, दोपहर और रात जो खाता हूं, सबका नाम हवाला रख दिया है। बच्चों के नाम घोटाला और स्कैंडल रख दिये हैं।
आज मैं भी सबके सामने गर्व से सिर उठाकर कहता हूं ,मैं भी हर रोज हवाला खाता हूं। साथ ही साथघोटाला और स्कैंडल पैदा करने की हिम्मत रखता हूं। |