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नये वर्ष के आगमन
के साथ
एक नया सवेरा आया
है,
कड़कड़ाती सरदी के
बीच
गुनगुनी धूप लाया
है।
दोस्ती के हाथ मिले
हैं,
साथ साथ कसमें खायी
है,
बदलती सोच से रिश्तों
में
मीठी मीठी गर्माहट
आयी है।
काल्पनिक सीमा रेखा
के कारण
जो बढ़ गयी थी,
वह दिलों की
कृत्रिम दूरी
अब कम हो रही है।
एक ने झुककर दूसरे
से
हाथ मिलाया,
दूसरे ने समझ लिया
कि
झुका है तो
यह तय है कि उसका
कद
मुझसे कुछ ऊँचा ही
होगा।
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सूरज अभी अभी तो
क्षितिज से बाहर आया है,
इन्तजार करो
कुछ और ऊपर आने दो।
मुलाकातें और भी होंगी,
दूरियाँ कुछ और कम होंगी।
गर्माहट का अहसास
और
बढ़ जायगा, जब
इस
पूस की सरदी में
गुनगुनी धूप का मज़ा देता सूरज
कुछ और चढ़ जायेगा।
इस
नये वर्ष में
विश्व के इस भाग में,
सबका विश्वास है
एक
नया इतिहास लिखा जायेगा।
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