धर्म परिवर्तन

एक दुबले पतले

कृशकाय भिखारी ने

एक खूबसूरत

महिला से कहा,

बहिनजी पिछले चार दिनों से

कुछ नहीं खाया है,

भगवान के नाम पर

कुछ दे दो।

 

महिला बोली,

बड़े भाग्यशाली हो,

जो भगवान ने तुम्हें,

इतने लम्बे समय तक,

खाना न खाने की

इच्छाशक्ति दी है।

 

यदि मेरे पास भी,

तुम्हारे जैसी,

इच्छाशक्ति होती,

तो आज मैं

विश्वसुन्दरी होती।

और तब मैंने अगर

एक फोटो भी,

तुम्हारे साथ खिंचवाया होता,

तो तू भी आज

कम से कम लखपति होता।

 

महिला को छोड़

भिखारी आगे आया,

और एक पंड़ित से टकराया।

बोला,

चार दिनों से भूखा हूं,

भगवान के नाम पर

कुछ दे दो।

 

पंड़ितजी बोले,

सब ईश्वर की माया है,

कहीं धूप, कहीं छाया है।

जो पिछले जन्मों के कर्म है,

उन्हीं का यह सब फल है।

जो जैसा करेगा,

वो वैसा भरेगा।

 

जब भगवान

खुद नही चाहता कि,

तुम्हें खाने को कुछ मिले,

तो मैं क्या कर सकता हूं,

जिससे तुम्हारी गाड़ी चले।

जाओ अपने घर और,

करो भगवत भजन।

जब वह चाहेगा,

तभी तुम्हारा पेट भरेगा।

 

दुखी मन से भिखारी ने

उठाया अपना झोला,

एक नेताजी को देख बोला,

साहब बहुत भूखा हूं

चार दिन से

कुछ नहीं खाया है।

 

नेताजी ने सुना और,

गुस्से से तमतमाये।

बोले,

बड़े ही अफ़सोस और

शर्म की बात है।

आजादी के

पचास वर्षों के बाद भी

देश के ये हालात है।

इन सबकी की जिम्मेदार

यह वर्तमान सरकार है,

जो एकदम निकम्मी

नाकारा और बेकार है।

इसे एक मिनट भी और

सत्ता में रहने का

क्या अधिकार है ?

 

तुम चिन्ता मत करो,

हमारी पार्टी

तुम जैसे भूखों और

असहायों के लिये

आंदोलन करेगी,

देशव्यापी बंद रखेगी।

सरकारी सम्पति की

तोड़फोड़ कर

जेलों को भरेगी।

इस निक्कमी सरकार को

उखाड़ फेंकेगी।

 

हमारी पार्टी इस सब पर

पांच सौ करोड़ खर्च करेगी।

यदि ये कम पडे तो

इतने ही और करेगी।

बस मेरे भाई,

थोड़ा सबर करो, और

अपने सब मित्रो को

हमारे आंदोलन की

खबर करो।

 

भिखारी बोला,

उन पांच सौ करोड़ से,

मुझे सिर्फ

पांच रूपये दे दीजिये,

बाजरे की रोटी

नमक के साथ खाउंगा,

वर्ना आज ही मर जाउंगा।

 

नेताजी बोले,

यह तो और भी अच्छा है,

इसी बहाने तू

शहीद हो जायेगा,

अपना वर्तमान खोकर,

इतिहास में तेरा नाम,

अमर हो जायेगा।

 

भिखारी में और

हिम्मत न थी,

खाना मिलने की

उम्मीद न थी।

चक्कर से आये और

अचेत हो गया।

 

होश में आया तो,

अलग ही नजारा था,

सामने थाली में

स्वादिष्ट खाना था।

खिलाने वाले बोले,

घबराओ नही, हमारे प्रभु के

दिन भर गुण गाओ,

और जितना चाहे,

भर पेट खाना खाओ।

 

एकदिन कुछ पत्रकार आये, पूछा

तुम्हें किसने धमकाया है,

जो तुमने मज़बूरी में

दूसरा धर्म अपनाया है।

 

भिखारी की आंखों में

आंसू भर आये, बोला

सच कहता हूं, दोस्तों !

कल भी मेरा धर्म रोटी था,

और आज भी

मेरा धर्म रोटी है।

मैने कोई धर्म परिवर्तन

नहीं किया !

धर्म परिवर्तन नहीं किया !