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एक संदेश आतंकवादी के नाम |
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सुनो देश के प्यारे दुश्मन, यह बन्दूक कहां से लाये हो ? जिसमें तुम बन्दूक रखते हो, वह सन्दूक कहां से लाये हो ?
जिससे तुम लाखों निर्दोषों की हत्या करते रहते हो, वे मशीनगने हथगोले और बारूद कहां से पाते हो ?
इस कोने और उस कोने में अपने देश के हर कोने में, कितनी हत्या की है तुमने ? इसकी गिनती की है तुमने ?
बहुत प्यार है माना तुमको, अपनी जननी मातृभूमि से। लेकिन क्या यह अलग थलग है अपनी प्यारी राष्ट्भूमि से ?
मेरे प्यारे भोले भाई किसने तुम्हारी मति भरमाई ? उस निकृष्ट राष्ट्रद्रोही को, हे भगवान ! मौत न आई ?
भरमाते है तुमको सारे सब्ज़बाग दिखलाते हैं। अपना असली चेहरा ये दिखलाने से शरमाते है।
सुनो देश के दुश्मन हैं ये हत्यारे और कातिल हैं। तुमको आगे करने वाले फांसी के ही काबिल है। |
चाहते हैं कि टुकड़े टुकड़े हो जाये यह भारत देश, लेकिन उनका सपना है यह सुन लो यह मेरा सन्देश।
खुद की उतनी शक्ति नहीं है, इन विदेशी कीड़ों की। इसीलिये ये मति भरमाते, तुम जैसे सब वीरों की।
अलग अलग प्रदेशों में तुम, प्यारे रंग भरो तो जानू। हर भारत वासी के दिल से पाओ प्यार तभी मैं मानू।
अपना प्यारा नाम छोड़कर, क्या तुमको अच्छा लगता है ? आतंकवादी जब कोई पुकारे, मेरे भाई कैसा लगता है ?
हर भारतवासी को तुम जब प्यार करो तो जानू मैं। कोई अच्छा काम करो तो, अपना मित्र बना लू मैं।
तुमको सब मिल गले लगा लें, यदि तुम यह बंदूक फैंक दो । देश नया त्यौहार मना ले, यदि तुम यह हथियार फैंक दो।
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