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अंधेर नगरी के
चौपट राजा ने ,
अपने चौपटपन का,
अपने दिमाग के
दिवालियेपन का
परिचय दिया।
एक कुत्ता
दूसरे कुत्ते पर
गली के
बीचोबीच
भौंक रहा था ,
आवाज़ का प्रदूषण
फैला रहा था।
सभी गांववाले
देख रहे थे ,
बीच बीच में
पत्थर फेंक
रहे थे।
राजा ने सब
गांववालों को
दोषी ठहराया ,
और
अपना चौपट
फैसला सुनाया।
उलटा लटका दो ,
हर एक गांव वाले को,
गांव के बाहर
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खेतों की मेड़ पर,
लगे एक एक पेड़ पर।
किस्मत अच्छी थी!
लटकाने के पहले ही
गिनती में कमी रह गयी ,
मानवता बची रह गयी।
गांववाले ज्यादा थे ,
और
पेड़ों की कमी पड़ गयी।
दोस्तों !
यह कोई मज़ाक नहीं ,
गम्भीर प्रश्न है।
अगर पेड़ इसी प्रकार
कटते रहे ,
और
जंगल घटते रहे ,
तो
एक दिन ऐसा आयेगा ,
जब हर एक मनुष्य के हेस्से
एक एक पेड़ दूर ,
एक एक टहनी या
एक एक पत्ता भी नहीं आयेगा।
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