आम या आम चुनाव

चुनावी माहौल में

मेरे छोटे पुत्र ने

एक दिन पूछ ही लिया।

पापा !

यह आम चुनाव क्या होता है?

 

बच्चे की उम्र देखते हुए

मैं जवाब को टाल गया,

लेकिन वह ताड़ गया कि,

माजरा कुछ और ही है।

जिद पकड़ गया कि,

बताना ही पड़ेगा,

आम चुनाव क्या होता है?

 

मैं बोला,

बेटा, "आम चुनाव"

दो तरह का होता है।

पहला वह जिसमें कि

एक आदमी बाज़ार जाता है,

और अपनी पसन्द का

आम चुन लेता है,

घर लाकर खाने के लिये।

 

दूसरा वह जिसमें

एक आम जाता है,

और

अपनी मर्जी से

एक आदमी चुन लेता है,

ताकि वह आदमी

उसे अगले पांच साल तक

धीरे धीरे खा सके।

आम भी

किस्म किस्म के होते है।

 

पका, अधपका और

बिलकुल कच्चा,

सीधा, सरल और

मन का सच्चा।

 

काटने वाला कड़क या

रस वाला पिलपिला।

नियमों का सख्त या

बिलकुल सेरफिरा।

 

शहरी या ग्रामीण,

हरदम खुश या गमगीन।

 

आम चाहे कैसा भी हो,

आदमी ने

तरीके ढ़ूंढ़ रखे हैं

उसे नेस्नाबूद करने के।

अगर कच्चा है तो,

चटनी बनाता है।

अधपका है तो

अचार में डालता है।

पिलपिला है तो

नस नस तक चूस जाता है।

और अगर

सख्त या कड़क है तो

बड़ी बेदर्दी से

काट खाता है।